कल शाम ऑफिस से निकलने ही वाली थी कि तेज बारिश शुरू हो गई। घर पहुंचने की जल्दी थी, लेकिन चुपचाप बैठी बारिश के रुकने का इंतजार करने लगी। मुझे याद नहीं कि बचपन में कभी सिर्फ इस वजह से स्कूल में देर तक रुकी रही होऊं कि बाहर बारिश हो रही है। ना। भीगते हुए ही घर पहुंच जाती थी। और तब बारिश में भीगने का मतलब होता था घर पर अजवाइन वाले गर्म सरसों के तेल की मालिश। और ये विदाउट फेल हर बार होता ही था। मौज में भीगूं तो डांट के साथ-साथ सरसों का तेल हाजिर। फिर जब घर से दूर रहने लगी तो धीरे-धीरे बारिश में भीगना कम होते-होते बंद ही हो गया। यूं नहीं कि बाद में जिंदगी में लोग नहीं थे, ब्वॉयफ्रेंड थे, पति बनने का इंतजार कर रहे पुरुष प्रेमी थे, लेकिन किसी के दिमाग में कभी नहीं आया कि बारिश में भीगी लड़की के तलवों पर गर्म सरसों का तेल मल दिया जाए। कभी नहीं। ऐसी सैकड़ों चीजें, जो मां हमेशा करती थीं, मां से दूर होने के बाद किसी ने नहीं की। किसी ने कभी बालों में तेल नहीं लगाया। मां आज भी एक दिन के लिए भी मिले तो बालों में तेल जरूर लगाएंगी। बचपन में खाना मनपसंद का न हो तो मां दस और ऑप्शन देती। अच्छा घी-गुड़ रोटी खा लो, अच्छा आलू की भुजिया बना देती हूं। मां नखरे सहती थी, इसलिए उनसे लडि़याते भी थे। लेकिन बाद में किसी ने इस तरह लाड़ नहीं दिखाया। मैं भी अपने आप सारी सब्जियां खाने लगीं।
मेरी जिंदगी में मां सिर्फ एक ही है। दोबारा कभी कोई मां नहीं आई, हालांकि बड़ी होकर मैं जरूर मां बन गई अपने प्रेमियों की। लड़कियां हो जाती हैं न मां अपने आप। प्रेमी, पति कब छोटा बच्चा हो जाता है, कब उस पर मुहब्बत से ज्यादा दुलार बरसने लगता है, पता ही नहीं चलता। उनके सिर में तेल भी लग जाता है, ये परवाह भी होने लगती है कि उसका फेवरेट खाना बनाऊं, उसके नखरे भी उठाए जाने लगते हैं, लेकिन लड़के कभी भी बड़े होकर मां नहीं बनते, नहीं बन पाते। लड़कों की जिंदगी में कई माएं आती हैं। बहन भी मां हो जाती है, पत्नी तो होती ही है, बेटियां भी एक उम्र के बाद बूढ़े पिता की मां ही बन जाती हैं, लेकिन लड़कियों के पास सिर्फ एक ही मां है। बड़े होने के बाद उसे दोबारा कोई मां नहीं मिलती। वो लाड़-दुलार, नखरे, दोबारा कभी नहीं आते।
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लड़कियों को जिंदगी में सिर्फ एक ही बार मां मिलती है। बाकी सारी जिंदगी वो सिर्फ मां होने का बोझ उठाया करती हैं और फिर से छोटी बच्ची हो जाना चाहती हैं।
मेरी जिंदगी में मां सिर्फ एक ही है। दोबारा कभी कोई मां नहीं आई, हालांकि बड़ी होकर मैं जरूर मां बन गई अपने प्रेमियों की। लड़कियां हो जाती हैं न मां अपने आप। प्रेमी, पति कब छोटा बच्चा हो जाता है, कब उस पर मुहब्बत से ज्यादा दुलार बरसने लगता है, पता ही नहीं चलता। उनके सिर में तेल भी लग जाता है, ये परवाह भी होने लगती है कि उसका फेवरेट खाना बनाऊं, उसके नखरे भी उठाए जाने लगते हैं, लेकिन लड़के कभी भी बड़े होकर मां नहीं बनते, नहीं बन पाते। लड़कों की जिंदगी में कई माएं आती हैं। बहन भी मां हो जाती है, पत्नी तो होती ही है, बेटियां भी एक उम्र के बाद बूढ़े पिता की मां ही बन जाती हैं, लेकिन लड़कियों के पास सिर्फ एक ही मां है। बड़े होने के बाद उसे दोबारा कोई मां नहीं मिलती। वो लाड़-दुलार, नखरे, दोबारा कभी नहीं आते।
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लड़कियों को जिंदगी में सिर्फ एक ही बार मां मिलती है। बाकी सारी जिंदगी वो सिर्फ मां होने का बोझ उठाया करती हैं और फिर से छोटी बच्ची हो जाना चाहती हैं।
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